श्री आशुतोष महाराज श्री महायोगी का महारहस्य

श्री आशुतोष महाराज श्री महायोगी का महारहस्य

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नई दिल्ली/अरविंद यादवः सर्व श्री आशुतोष जी महाराज लगभग 2 वर्षों से गहन समाधि में लीन है। तथा भविष्य में निश्चित समय के बाद अवश्य वापस आयेंगे उनका उद्देश्य केवल विश्व में शांति की स्थापना है। उनका कथन है कि विश्व में शांति आयेगी। केवल व केवल ब्रह्मज्ञान से। और ब्रह्मज्ञान की प्राप्ति होगी केवल दिव्यज्योति जागृति संस्थान से इसी उद्देश्य की प्राप्ति हेतु उनके अनुयायी करोड़ो शिष्य विश्व भर में जिनकों उन्होंने ब्रह्मज्ञान प्रदान किया है अनवरत ध्यान साधना कर रहे हैं ताकि विश्व में शांति की स्थापना हो सके। हमारी भारतीय संस्कृति पुनः स्थापना व रक्षा हेतु ही उन्होंने अपने करोड़ो शिष्यों को ब्रह्मज्ञान की दिक्षा प्रदान की है। तथा स्वयं भी समाधि में लीन है। मैंने स्वयं अपनी आंखों से देखा है कि समाधि में लीन होने से पहले भी वे स्वयं 24 घंटों में 2 बार लगभग ढाई से तीन घंटे नियमित साधना करते थे। तथा अपने ज्ञानि शिष्यों को बिना किसी रूकावट के 24 घंटे में कम से कम ढाई घंटे अनिवार्य रूप से ध्यान साधना करने की आज्ञा प्रदान की थी। अपने लाखों शिष्यों को उन्होंने ध्यान में अनुभव करवाया है कि वे गहन समाधि में लीन है तथा भविष्य में अवश्य ही समाधि से बाहर आएंगे। मैंने स्वयं ध्यान साधना में गुरू देव सर्व श्री आशुतोष महाराज श्री को गहन समाधि में लीन देखा है। तथा समाधि से वापिस बाहर आते देखा है। मैं दावे के साथ कह सकता हूं कि सर्व श्री आशुतोष श्री विश्व में शांति के लिए ही गहन समाधि में लीन हैं तथा निकट भविष्य में अवश्य ही समाधि से बाहर वापिस आएंगे।

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