गुरू शिव की महिमा

जम्मू, जम्मू कश्मीर/अरूण गुप्ताः प्राचीनकाल में भीम नाम एक कमहाप्रतापी राक्षस था। वह कामरूप प्रदेश में अपनी मां के साथ रहता था। वह महाबली राक्षस राक्षसराज रावण के छोटे भाई, कुंभकर्ण का पुत्र था। लेकिन उसने अपने पिता को कभी देखा न था। उसके होश संभालने के पूर्व ही भगवान राम के द्वारा कुंभकर्ण का वध कर दिया गया था। जब वह युवावस्था को प्राप्त हुआ तब उसकी माता ने उसे सारी बातें बतायी। भगवान् विष्णु के अवतार श्रीरामचंद्र जी द्वारा अपने पिता के वध की बात सुनकर वह महाबली राक्षस अत्यंत संतप्त और क्रुद्ध हो उठा। जब वह निरंतर भगवान श्रीहरि के वध का उपाय साचने लगा। उसने अपने अभीष्ट की प्राप्ति के लिए एक हजार वर्ष तक कठिन तपस्या की। उसकी तपस्या से प्रसन्न होकर ब्रह्माजी ने उसे लोक विजयी होने का वर दे दिया। अब तो वह राक्षस ब्रह्माजी के उस वर के प्रभाव से सारे प्राणियों को पीडि़त करने लगा। उसने देव लोक पर आक्रमण करके इंद्र आदि सारे देवताओ को वहां से बाहर कर दिया। पुरे देवलोक का अब भीम का अधिकार हो गया। इसके बाद उसने भगवान श्रीहरि को भी युद्ध में परास्त कर दिया। श्रीहरि को पराजित करने के पश्चात उसने कामरूप के परम शिवभक्त राजा सुदक्षिण पर आक्रमण करके उन्हें मंत्रियों अनुचरों सहित बंदी बना लिया। उसके अत्याचार से वेदों, पुराणों, शास्त्रों और स्मृतियों का सर्वत्र एकदम लोप हो गया। वह किसी को कोई धार्मिक कृत्य नहीं करने देता था। इस प्रकार यज्ञ, तप स्वाध्याय आदि के सारे काम एकदम रूक गये।
उसके अत्याचार की भीषणता से घबराकर ऋषि मुनि और देव गण भगवान शिव की शरण में गये और उनमें अपना तथा अन्य सारे प्राणियों का दुख कहा। उनकी यह प्रार्थना सुनकर भववान शिव ने कहा मैं शीघ्र ही उस अत्याचारी राक्षस का संहार करूंगा। उसने मेरे प्रिय भक्त कामरूप नरेश सुदक्षिणा को सेवकों सहित बंदी बना लिया है। वह अत्याचारी असुर अब और अधिक जीवित रहने का अधिकारी नहीं रह गया है। भगवान अपने अपने स्थान को वापस लौट गये। इधर राक्षस भीम के बंदी गृह में पड़े हुए राजा सुदक्षिण ने भगवान शिव का ध्यान किया। वे अपने सामने पार्थिव शिवलिंग रखकर अर्चना कर रहे थे। उन्हें ऐसा करते देख क्रोधंमत होकर राक्षस भीम ने अपनी तलवार से उस पार्थिव शिवलिंग पर प्रहार किया। किंतु उसकी तलवार का स्पर्श उस शिवलिंग पर प्रहार हो भी नहीं पापया था कि उसके भीतर से साक्षात भूतनाथ भगवान शंकरजी वहां प्रकट हो गये। उन्होंने अपनी हुकारमात्र से उस राक्षस को वहीं जलाकर भस्म कर दिया।

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