सीने में पांच गोलियां खाकर भी डटा रहा ये जवान

अमित कुमार, सांबा/जम्मू और कश्मीरः सुनील धीमान, शाहपुर। दस साल पहले भी सेना में सेवाएं देते समय जम्मू-कश्मीर के पुंछ में भी संजीवन राणा का देश के दुश्मनों से सामना हो चुका है। उस दौरान भी उन्हें गोलियां लगी थीं, लेकिन तब वह मौत को मात दे आए थे। पठानकोट एयरबेस में जिस दिन आतंकी हमला हुआ, उस दिन भी वह घर छुट्टी पर जाने वाले थे।

डीएससी के सुरक्षा कर्मी संजीवन राणा वर्ष 2009 में आर्मी से रिटायर हुए थे। इसके छह माह बाद ही डिफेंस सिक्योरिटी कोर्प्स में हवलदार भर्ती हुए। उन्होंने दो जनवरी को छुट्टी के लिए आवेदन किया था। इसी दिन आतंकी हमले में वे शहीद हो गए। संजीवन को गोलियां लगने की खबर सुनकर उनका परिवार पठानकोट पहुंचा, लेकिन सेना के अधिकारियों ने पत्नी को संजीवन को नहीं देखने दिया। उन्हें वापस घर भेज दिया।

सैन्य अधिकारियों ने रविवार सुबह संजीवन के परिजनों को उनकी शहादत की सूचना दी। संजीवन की शहादत के बाद उनके पैतृक गांव में मातम का माहौल है। शहीद संजीवन की पांच बहने हैं। वह परिवार में सबसे बड़े थे। उनके माता-पिता का स्वर्गवास हो चुका है। अब परिवार में वह ही सबसे बड़े थे। संजीवन जब सेना में थे तो वह पहलवानी भी करते थे। सेना की तरफ से कुश्ती प्रतियोगिताओं में भाग लेते थे।

उनके पिता भी आर्मी में पहलवानी करते थे। गांव के पूर्व उपप्रधान अजय राणा, ओंकार राणा, बिंदु राणा, ज्ञान चंद, कर्म सिंह, बलदेव सिंह, करतार राणा ने बताया कि संजीवन बहुत ही मिलनसार थे। उन्होंने दो जनवरी को घर पर छुट्टी पर आना था। एसडीम धर्मशाला श्रवण मांटा ने कहा कि शहीद संजीवन का पार्थिव शरीर सोमवार को उनके पैतृक गांव में पहुंचेगा।

पत्नी-बच्चों का रो-रोकर बुरा हाल- पठानकोट में हुए आतंकी हमले में शहीद संजीवन राणा की पत्नी और बच्चों का रो-रोकर बुरा हाल है। पत्नी पिंकी देवी सजीवन की शहादत की खबर सुनते ही बेसुध हो गईं। उनके बच्चों शुभम, कोमल और शिवानी का भी रोक-रोकर बुरा हाल है।

पठानकोट एयरबेस की उस बिल्डिंग को बारूद लगाकर उड़ाने की तैयार हो रही है, जिसमें आतंकियों के छिपे होने की आशंका है। एएनआई के मुताबिक, एयरबेस के भीतर तेज धमाका सुनाई दिया। सुबह गोलीबारी की आवाज भी सुनाई दी।

ये स्पष्ट नहीं है कि एयरबेस के भीतर अभी कितने आतंकी छिपे हैं, हालांकि ये माना जा रहा है ‌कि कम से कम दो आतंकी छिपे हो सकते हैं। सेना, एनएसजी और एयरफोर्स की ओर से की गई संयुक्त प्रेस कांफ्रेंस बताया गया कि आतंकी जिस इमारत में छिपे हैं, वह एयरफोर्स कर्मियों का रिहायशी इलाका है। प्रेस कांफ्रेंस में बताया गया कि आतंकी एयरबेस उड़ाने की तैयारी करके आए थे। उनके पास काफी मात्रा में गोलाबारूद था।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज फिर राष्‍ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोवाल, रक्षा मंत्री मनोहर परिकर और वित्तमंत्री अरुण जेटली से मुलाकात की है।

पाकिस्तान सीमा से तकरीबन 30 किमी दूर पठानकोट एयरबेस पर शनिवार को हमले के बाद आतंकियों से मुठभेड़ का दौर रविवार को दोबारा शुरू हो गया। एयरबेस के भीतर शनिवार को चार आतंकियों के मारे जाने के बाद सरकार ने ऑपरेशन खत्म होने की घोषणा कर दी थी, लेकिन परिसर के भीतर छिपे कम से कम दो आतंकियों ने रविवार दोपहर में ग्रेनेड विस्फोट कर सुरक्षा बलों पर हमला बोल दिया।

संदिग्ध चरमपंथियों के चंगुल से छूटे गुरदासपुर के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी सलविंदर ने बीबीसी से कहा है कि चरमपंथियों ने उन्हें जहां छोड़ा था, उन्हें दोबारा मारने के लिए वो वापस वहीं आए थे।

31 दिसंबर की रात सलविंदर सिंह, राजेश वर्मा और मदन गोपाल जब पठानकोट से गुरदासपुर आ रहे थे तब गाड़ी समेत उनका अपहरण कर लिया गया था।

माना जा रहा है कि ये वही चरमपंथी थे जिन्होंने बाद में पठानकोट एयरबेस पर हमला किया। पठानकोट एयरबेस में चरमपंथियों के ख़िलाफ़ सैन्य कार्रवाई जारी है।

शनिवार की सुबह से जारी अभियान में सात सुरक्षाकर्मी और चार चरमपंथियों की मौत हुई है। बीबीसी से बातचीत में सलविंदर सिंह ने बताया कि पूरी घटना ने उन्हें हिलाकर रख दिया है और वो “भगवान के शुक्रगुज़ार हैं कि जीवित बच गए।”

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