विफल होता हुआ खनिज संपदाओं की नीलामी का भारत सरकार का कार्यक्रम

सुब्रत कुमार, भुबनेश्वर/उडि़साः दिनांक ३० दिसम्बर, २०१५ को भारत सरकार के कोयला मंत्रालय के नामनिर्दिष्ट प्राधिकारी द्वारा चौथे चरण में होने वाले कोयला खानों की नीलामी को रद्द कर दिया गया है। भारत के सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दिनांक २५ अगस्त, २०१४ को पारित आदेशानुसार भारत सरकार के कोयला मंत्रालय द्वारा सभी २०४ पूर्व आवंटित कोयला खद्दानों को रद्द कर दिया गया था। तत्पश्चात् भारत सरकार द्वारा नये सिरे से नीलामी प्रक्रिया एवं मापदण्ड तैयार कर अधिसूचना जारी कर दी गई। केन्द्र-सरकार द्वारा कोयला खान (विशेष उपबंद्ध) अध्यादेश (संख्या-२), २०१५ द्वारा प्रदत शक्तियों का प्रयोग करते हुये अभी तक उक्त अध्यादेश को अनुसुची-२ एवं अनुसुची-३ के कूल ३१ कोयले खद्दानों का सफलतापुर्वक नीलामी किया जा चुका है। परन्तु चौथे चरण की नीलामी को अचानक रद्द कर दिया गया, जिसे विगत १९ नवम्बर २०१५ को कोयला मंत्रालय द्वारा नामनिर्दिष्ट प्राधिकारी को १० कोयला खान को नीलाम करने का निर्देश दिया गया था। इस संदर्भ में नामनिर्दिष्ट प्राधिकारी द्वारा दिनांक २० नवम्बर, २०१५ को विज्ञप्ति भी दी गई थी। उक्त नीलामी के कार्यक्रम में महाराष्ट्र, छत्तीसगढ, मध्यप्रदेश, झारखण्ड एवं पश्चिम बंगाल के दो-दो कोयले के खद्दान शामिल थे। नीलामी के कार्यक्रम में निविदा डालने की अंतिम तिथी दिनांक ३१ दिसम्बर, २०१५ थी, परन्तु ठीक इसके एक दिन पहले इस नीलामी कार्यक्रम को रद्द कर दिया गया। सुत्रों के अनुसार कोयला मंत्रालय को पर्याप्त मात्रा में बोलियाँ नहीं मिलने को वजह माना जा रहा है। नीलामी रद्द होने के कारण निविदा क्रय करने वाले कम्पनियों को पाँच लाख रुपए कर का व्यय एवं उसमें लगाये गये समय दोनो का नुकसान हुआ, साथ ही सरकार की खनिज संपदाओं के नीलामी संबंधित प्रबंधन एवं नियमों का विफल होना प्रतीत हो रहा है।
अगर सरकार के पास निविदा-पत्र क्रय करने वाले निजी निवेशक या कम्पनियाँ ही नहीं है, या फिर ३१ कोयले खद्दानों की नीलामी के बाद कोयले की आवश्यकता निजी निवेशकों को करीब-करीब पुरी हो चुकी है, तो यह सवाल उठना लाजमी है कि पीछली सरकारों द्वारा कोयले की आवश्यकता को कौन से समिकरण या मापदण्ड के अनुरुप २०४ खद्दानों को आवंटित किया गया था?
कोयले के आलावा भारत सरकार के खनन मंत्रालय के द्वारा पारित अध्यादेश के अनुसार विभिन्न राज्यो ने भी अपने धातु रहित खनिज एवं उद्दोग में उपयोग होने वाली खनिज सम्पदाओं की नीलामी करना शुरु कर दिया है। अभी तक महाराष्ट्र, छत्तीसगढ, कर्नाटक, झारखण्ड, राजस्थान, गुजरात एवं उरीसा द्वारा विभिन्न खनिजों की नीलामी कार्यक्रम की विज्ञप्ति दी गई है। परन्तु अब यह देखना काफी दिलचस्प होगा की ये सारे राज्य इस प्रक्रिया मे सफल होते हैं या नही, साथ ही यह भी देखना बाकी है कि इस प्रक्रिया से इस्पात एवं सीमेंट उद्दोग को कितनी मदद मीलती है जो कि इस समय बेहद मुश्किल दौर से गुजर रहा है।

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