‘मेक इन इण्डिया’ के तहत पीएम द्वारा श्रमिक योजनाओं का शुभारंभ

नई दिल्ली/नगर संवाददाताः प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा स्वतंत्रता दिवस के मौके पर लाल किले से जिस ‘मेक इन इण्डिया’ की घोषणा की गई थी उसमें श्रमिकों के लाभार्थ हेतु छः योजनाओं को भी ‘‘श्रमेव जयते’’ योजना के तहत लागू करने को मंजूरी दे दी है। कैबिनेट ने इन स्कीमों को अमली जामा पहनाने के लिए मंजूरी दे दी है। इस योजना के तहत प्रधानमंत्री चाहते हैं कि जरूरी चीजों के पैकेट या वस्तु पर ‘मेक इन इण्डिया’ लिखा हो। यह शब्द तभी लिखा जा सकता है जब उस वस्तु का निर्माण भारत में हुआ हो। इसके लिए उन्होंने भारत की घरेलू और विदेशी कंपनियों को निवेश करने के लिए प्रोत्साहित किया है। इन तमाम कंपनियों में काम करने वाले श्रमिकों के लाभ हेतु औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (आईटीआई) और स्वास्थ्य बीमा योजना जैसी योजनाओं को ‘‘श्रम कानून’’ के तहत फायदा पहुंचाने के लिए पीएम उत्सुक हैं।
सब योजनाओं को लागू करना और उन श्रमिकों को अधिक से अधिक फायदा पहुंचाने का प्रयास करना मोदी जी का सराहनीय कदम है।
पर क्या इन योजनाओं का लाभ सभी श्रमिकों को वास्तविक रूप से मिल पायेगा? इसके लिए यह तय कर पाना बहुत मुश्किल हैै।
आम तौर पर देखा यह जाता है कि जो योजनाएं लाभार्थ हेतु जिस श्रमिक के लिए बनी हैं, वह उन तक पहुंच ही नहीं पातीं। इन योजनाओं को चलाने वाले बड़-बड़े अधिकारी श्रमिकों तक पहुंचने ही नहीं देते। यह बहुत बड़ी विडम्बना है। जब इन योजनाओं को लागू करने वाले अधिकारी स्वहित छोड़कर श्रमिक हित की सोचेंगे तब ही यह प्रयास संभव हो सकेगा।

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